jac board class 10 science important question

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प्रश्न :- मानव में वहन तंत्र के घटक  कौन से हैं ? इन घटकों के क्या कार्य है ?

उतर :-

मानव में वहन तंत्र के घटक और कार्य निम्नलिखित है –
i). ह्रदय – रुधिर को एक पंप की तरह शरीर के विभिन्न भागो में भेजना, अशुद्ध रक्त को शुद्ध होने के लिए फेफड़ो और गुर्दों में भेजना तथा शुद्ध रुधिर को शरीर के विभिन्न भागो में भेजना |
ii). धमनियाँ – शुद्ध या आक्सिजनित रुधिर को ह्रदय से दूर शरीर के अंगो में भेजना |
iii). शिराएँ -  अशुद्ध या विआक्सिजनित रुधिर को रक्त तक लाना |
iv). कोशिकाए – रक्त को शरीर के संकीर्ण भागो एवम त्वचा में भेजना |
v). बिम्बाणु या प्लेटलेट्स – रुधिर का थका बनने में सहायता करना एवम अनुरक्षण |



प्रश्न :-  रुधिर और लसिका में अंतर बतये |

उतर :-

रुधिर और लसिका में अंतर –
रुधिर
1). यह लाल रंग का होता है |
2). इसमें हिमोग्लोबिन होता है |
3). इसमें लाल रक्त कणिकाए ,श्वेत रक्त कणिकाए और रुधिर पट्टिकाए होती है |
4). यह ह्रदय के अंगो तक बहता है और वापस आता है |
5). इसमें श्वसन वर्णक , आक्सीजन , कार्बन डाईआक्साइड और वर्ज्य पदार्थ होते हैं |
6). इसमें सभी प्रकार के रक्त प्रोटीन पाए जाते है |

लसीका
1). यह रंगहीन या हल्के पीले रंग का होता है |
2). इसमें हिमोग्लोबिन नहीं होता है |
3). इसमें कणिकाए नहीं होती है |
4). यह केवल एक ही दिशा में बहता है अर्थात उतकों से ह्रदय की ओर |
5). यह शरिर की कोशिकाओ को नहलाता है |
6). इनमे फाईब्रिनोजन नहीं होता है |

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प्रश्न :- आक्सिजनित तथा विआक्सिजनित रुधिर में अंतर लिखे |

उतर :-

आक्सिजनित तथा विआक्सिजनित रुधिर में अंतर-

आक्सिजनित रुधिर
1). इसमें O2 की मात्रा अधिक होता है
2). इसमें CO2 की मात्रा कम होती है |
3). यह ह्रदय से शरीर के समस्त भागो में जाता है |

विआक्सिजनित रुधिर
1). इसमें CO2 की मात्रा अधिक होती है |
2). इसमें O2 की मात्रा बहुत कम होती है |
3). यह शरीर के समस्त भागो से ह्रदय की ओर जाता है |


प्रश्न :- धमनी और शिरा में अंतर लिखे |

उतर

धमनी और शिरा में अंतर-
धमनी
1). धमनी की दीवार मोटी होती है |
2). धमनी ह्रदय से रक्त लेकर शरीर के विभिन्न हिस्सों में पहुंचाते हैं |
3). इनमे वाल्व नहीं होता है |

शिरा
1). शिरा की दीवार पतली होती है |
2). यह शरीर के विभिन्न अंगो से रक्त लेकर ह्रदय में पहुंचाते है |
3). इनमे वाल्व होता है |



प्रश्न :- जाइलम तथा फ्लोएम में पदार्थो के वहन में क्या अंतर है ?

उतर

जाइलम
1). जाइलम जड़ से पत्तियों तथा अन्य भागो में जल तथा घुले लवण परिवहित करते है |
2). जाइलम में पदार्थ का परिवहन वाहिकाओं तथा वाहिनियों द्वारा होता है , जो मृत उतक है |
3). वास्पोत्सर्जन पुल के कारण ऊपर की ओर जल तथा घुले लवणों का चढना संभव हो पाता है | यह पत्ती की कोशिकाओं से जल अणुओं के वास्पीकरण से उत्पन्न खिंचाव के कारण होता है  |
4). जल का परिवहन सरल भौतिक गति के अंतर्गत होता है | उर्जा खर्च नहीं होता है | ATP की आवश्यकता नहीं है |

फ्लोएम
1). फ्लोएम , भोजन पदार्थो के घुली अवस्था में पत्तियों से पादप के दुसरे हिस्सों तक परिवहित करता है |
2). फ्लोएम में पदार्थो का परिवहन चालनी ट्यूबो द्वारा सहचर कोशिकाओं की मदद से होता है , जो जैव कोशिकाए हैं |
3). स्थानांतरण में, पदार्थ फ्लोएम उतक में ATP उर्जा का इस्तेमाल करते हुए होता है |यह परासरण दाब बढ़ा देता है जो फ्लोएम से पदार्थो को उतकों की ओर भेजता है , जिनमे दाब कम होता है |
4). फ्लोएम में स्थानांतरण एक सक्रिय क्रिया है तथा इसमें उर्जा की आवश्यकता होती है |यह उर्जा ATP से प्राप्त होती है |

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प्रश्न :- पादप में जल एवम खनिज लवण का वहन कैसे होता है ?

उतर :-

पादप में जल एवम लवण का वहन जाइलम वाहिनियों द्वारा होता है | परासरण के नियमानुसार मृदा के कणों के बिच उपस्थित खनिजो का जलीय घोल जड़ो के मूलरोमों में प्रवेश करता है और इसीप्रकार उच्च सांद्रण से निम्न सांद्रण की ओर बढ़ता हुआ जाइलम वाहिनियों में पहुँच जाता है | वाष्पोत्सर्जन के कारण उत्पन्न खिंचाव, परासरण दाब के प्रभाव में जलीय घोल पौधे के शीर्ष भाग तक पहुँच जाता है | इसे रसारोहन भी कहते हैं |


प्रश्न :- लसीका ( लिम्फ ) क्या है ? इसका क्या कार्य है ?

उतर :-

उत्तकों के अंतर्कोशिकीय अवकाशों में पाया जाने वाला प्लाज्मा प्रोटीन तथा रक्त कोशिकाओं से से बना रंगहीन तरल पदार्थ लसिका कहलाता है | यह कोशिका झिल्ली के छिद्रों से होकर बाहर निकले हुए प्लाज्मा, प्रोटीन तथा रक्त कोशिकाओं के मिलने से बनता है |
लसिका शरीर की संक्रमण से सुरक्षा करता है, प्रोटीन एवम वसा की दीर्घाणुओं का परिवहन करता है, रक्त उत्तको के अतिरिक्त जल को रक्त में सम्मिलित कराता है | 


प्रश्न :- मनुष्य में दोहरा परिसंचरण की व्याख्या करें –

उतर :-

मनुष्य में रक्त को ह्रदय से होकर दो बार गुजरना पड़ता है | इसे दोहरा परिसचरण कहते हैं |
 शिराओं द्वारा शरीर के विभिन्न भागो से अशुद्ध रक्त ह्रदय में लाया जाता है | ह्रदय उसे शुद्ध होने के लिए अलग मार्ग से फुफ्फुस में भेज देता है जहाँ कार्बन डाइआक्साइड बाहर विसरित हो जाती है और आक्सीजन रक्त में आ जाती है | इसप्रकार आक्सिजनित युक्त रक्त पुनः ह्रदय में आता है जिसे शरीर के अंगो में पहुँचाने के लिए पंप कर दिया जाता है |


प्रश्न :- ह्रदय में चार चैम्बरो के होने से क्या लाभ है ?

उतर :-

आक्सीजन और कार्बनडाइआक्साइड दोनों का एक ही रक्त के माध्यम से परिवहन होता है | इसलिए यह आवश्यक है की आक्सीजन से समृद्ध रक्त को कार्बन डाइआक्साइड से समृद्ध रक्त में मिलने से रोका जाये | कार्बन डाइआक्साइड से समृद्ध रक्त को फेफड़ो की भितियों में जाना आवश्यक होता है ताकि उसकी कार्बन डाइआक्साइड को अलग किया जा सके | इसके साथ ही आक्सीजन युक्त कार्बन डाइआक्साइड विहीन रक्त को ह्रदय में रखना होता है ताकि उसको शरीर के अन्य अंगो में भेजा जा सके | इसलिए मानव ह्रदय में चार चैंबर होते हैं |

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प्रश्न :- नेफ्रान किसे कहते हैं ? उत्सर्जन में इसकी क्या भूमिका क्या है ?

उतर :-

गुर्दे के भीतर असंख्य वृक्क नलिकाए होती है जिन्हें अंग्रेजी में नेफ्रान कहते हैं |
उत्सर्जन में में नेफ्रान की भूमिका –
वृक्क नलिकाए मूत्र छनन क्रिया से सीधे संबंधित होती है | वृक्क नलिका की रचना और कार्य का विवरण इस प्रकार है –
प्रत्येक नेफ्रान का एक सिरा कप जैसी रचना बनता है जिसे बोमेन कैप्सूल कहते हैं | इसके अन्दर रक्त कोशिकाओं का जाल होता है जिसे कोशिका गुच्छ कहते हैं | कोशिका गुच्छ में उच्च रक्त चाप के कारण उत्सर्जी पदार्थ छान कर बोमेन कैप्सूल में चले जाते हैं और वहां से कुंडलित नाल और हेनेल्स लूप से होते हुए संग्राहक नलिका में पहुँचते हैं | संग्राहक नलिका मूत्राशय तक जाती है | इसप्रकार छने हुए उत्सर्जी पदार्थ मूत्राशय में पहुँचते हैं जहाँ उन्हें समय-समय पर त्याग दिया जाता है |


प्रश्न :- मानव उत्सर्जन तंत्र का वर्णन करें |

उतर :-

गुर्दे, मूत्र-वाहीनी, मूत्राशय और मूत्र उत्सर्जन नली को सम्मिलित रूप से उत्सर्जन तंत्र कहते हैं |
  मानव के शरीर में उदर  भाग में पीछे की ओर दो गुर्दे होते हैं | प्रत्येक गुर्दे मूत्र वाहिनी नलिका द्वारा मूत्राशय से संबंधित होता है | मूत्राशय एक थैलिनुमा रचना होती है जिसमे मूत्र इक्कठा रहता है | मूत्राशय जनन नलिका द्वारा बाहर खुलता है | इसी नलिका से होकर शरीर से बाहर मूत्र का निष्कासन किया जाता है |


प्रश्न :- पौधे में उत्सर्जन किस प्रकार होता है ?

उतर :-

पौधे में विभिन्न पदार्थो का उत्सर्जन निम्न प्रकार से होता है –
i). प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में उत्पन्न आक्सीजन तथा कार्बन डाइआक्साइड गैस उत्सर्जी उत्पाद है जिनका उत्सर्जन पत्तियों में उपस्थित रंध्रो द्वारा होता है |
ii). पौधों द्वारा प्राप्त किये गये अतिरिक्त जल का उत्सर्जन वाष्पोत्सर्जन द्वारा होता है | इसमें रंध्र मुख्य भूमिका निभाते हैं |
iii). पत्तो के गिरने तथा छाल के उतरने से संग्रहित उत्सर्जी पदार्थो का उत्सर्जन होता है |



प्रश्न :- अमीबा में खद्यो अंतर्ग्रहण , पाचन, अवशोषण एवम अनपचे भोजन का उत्सर्जन कैसे होता है ?

उतर:-

अमीबा में खद्यो अंतर्ग्रहण , पाचन, अवशोषण एवम अनपचे भोजन का उत्सर्जन-
i). अमीबा अपनी सतह पर अँगुलियों जैसी अस्थायी प्रवर्ध बनता है | इन्हें कूटपाद कहते हैं | कूटपाद भोजन को घेरकर एक खाद्य-धानी बनाते हैं और स्वयं गायब हो जाते हैं |
ii). कोशिका द्रव्य में उपस्थित पाचक एंजाइम रिक्तिका या खाद्य-धानी में प्रवेश करते हैं और भोजन को पचाते हैं | खाद्य-धानी कोशिका में भ्रमण करती रहती है और पचे हुए भोजन के कण विसरित होकर कोशिका द्रव्य में मिलते रहते हैं |
iii). रिक्तिका घूमते घूमते कोशिका की सतह से चिपककर फट जाती है | तब अनपचा भोजन कोशिका से बाहर निकल जाती है |

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प्रश्न :- नेफ्रान और नेफ्रीडिया में अंतर लिखे |

उतर :-

  नेफ्रान-
i). यह वृक्क की संरचनात्मक व कार्यात्मक इकाई है |
ii). यह मनुष्य के वृक्क में पाए जाते हैं |
iii). ये एक ही प्रकार के होते हैं – नेफ्रेडिया अध्यावरणी त्वचीय
iv). ये मुत्रवाहिनी में खुलते हैं |
 नेफ्रीडिया-
i). यह एक उत्सर्जक अंग है |
ii). ये केचुए में पाया जाता है |
iii). ये दो प्रकार के होते हैं – पटीय नेफ्रिडीया तथा ग्रसनीय नेफ्रिडीया
iv). ये शरीर के बाहर , आहार नाल में घुलते हैं |


प्रश्न :- पाचन किसे कहते हैं ? मनुष्य के शरीर में कार्बोहाईड्रेट एवम प्रोटीन का पाचन कैसे होता है ?

उतर :-


पाचन :-
अघुलनशील एवम जटिल भोजन को घुलनशील एवम सरल रूप में बदलना पाचन कहलाता है |
कार्बोहाईड्रेट का पाचन
i). मुख से लार ग्रंथियों से निकलने वाला टायलीन नमक एंजाइम कार्बोहाईड्रेट को माल्टोज में बदल देता है |

ii). पक्वाशय में अग्नाशय से आने वाला पाचक एंजाइम माल्टोज को ग्लूकोज में बदल देता है |

iii). छोटी अंत में पाए जाने वाला एंजाइम सक्कस इंटेरिकास शेष बचे कार्बोहाईड्रेटको ग्लूकोज में बदल देता है |

प्रोटीन का पाचन :-
i). अमाशय में अमाशयिक रस ( जठर रस ) में पाया जाने वाला पेप्सिन नामक एंजाइम अघुलनशील प्रोटीन को पेप्टोन में बदल देता है |

ii). पक्वाशय में अग्नाशयिक रस में पाए जाने वाला प्रोटीन पाचक एंजाइम ट्रिप्सिन, पेप्टोन को अमीनो अम्ल में बदल देता है |

iii). छोटी आंत में सक्कस इनटेरिकस द्वारा शेष बचे प्रोटीन को अमीनो अम्ल में बदल दिया जाता है

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प्रश्न :- मनुष्य में भोजन की पाचन क्रिया का वर्णन करें |

उतर :-

मनुष्य का भोजन निम्नाकित चरणों में संपन्न होता है –
i). मुख में पाचन :- मुख से लार ग्रंथियों से निकलने वाले लार में टायलीन नामक कार्बोहाइड्रेट-पाचक एंजाइम होता है जो कार्बोहाइड्रेट को माल्टोज में बदल देता है | इसके बाद भोजन अमाशय में पहुँचता है |
ii). अमाशय में भोजन का पाचन :- अमाशय की आन्तरिक भित्ति में पायी जाने वाली ग्रंथियों से हाइड्रोक्लोरिक अम्ल निकलता है  जो (a) माध्यम को अम्लीय बनाता है और (b) बीमारी के जीवाणुओं को नष्ट कर देता है | अमाशय की जठर ग्रंथियों से निकलने वाली जठर रस में प्रोटीन पाचक एंजाइम पेप्सिन पाया जाता है जो प्रोटीन को घुलनशील पेप्टोंन में बदल देता है | बच्चो में दुद्ध की केसिं को पचाने के लिए रेनिन नमक अतिरिक्त एंजाइम भी इस में पाया जाता है अमाशय के बाद भोजन पक्वाशय में पहुँचता है |

iii). पक्वाशय में पाचन :- यहाँ भोजन से दो प्रकार के पदार्थो का मेल होता है (a) पित और (b) अग्नाशयिक रस | पित माध्यम को क्षारिय बनता है , वसा पायसीकरण करता है और बीमारियों के जीवाणुओं को नष्ट करता है |

iv). छोटी आंत में पाचन :- इसमें उपर्युक्त में से प्रत्येक पदार्थ के शेष भागो को पचाने के लिए एंजाइम होते हैं | माल्टोज ग्लूकोज में बदल दिया जाता है और आंत में पाए जाने वाले रसाकुरों द्वारा पचा हुआ भोजन अवशोषित करके रक्त में भेज दिया जाता है |

v). बड़ी आंत में पाचन :- बड़ी आंत में अनपचे भोजन के अतिरिक्त जल का अवशोषण होता है एवम अनपचे भोजन का बहिष्करण कर दिया जाता है |


 प्रश्न :- पोषण को परिभाषित करें | अमीबा में पोषण प्रक्रिया का सचित्र वर्णन करें |

उतर :-

पोषण :- जीवधारियों द्वरा पोषक पदार्थो के अंतर्ग्रहण और उपयोग की प्रक्रिया को पोषण कहते हैं |
अमीबा में पोषण :- अमीबा में कुटपादों द्वारा भोजन का अंतर्ग्रहण होता है | भोजन खाद्य-धानी में बंद हो जाता है | पाचक रस खाद्य-धानी में प्रवेश करके भोजन को पचाते हैं | पाचित भोजन विसरित होकर खाद्य-धानी से बाहर निकलकर जीवद्रव्य में मिलता रहता है | खाद्यधानी कोशिका में भ्रमण करती रहती है |
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प्रश्न :- पाचन तंत्र किसे कहते हैं ? मनुष्य में पाचन तंत्र के विभिन्न भागो के नाम और उनके कार्य लिखें |

उतर :-


भोजन की पाचन क्रिया और अवशोषण से संबंधित अंगो के समूह को पाचन तंत्र कहते हैं |
मनुष्य के पाचन तंत्र के भाग और उनके कार्य निम्नलिखित है –
i). मुख – यह दांतों की सहायता से भोजन को महीन टुकड़ो में बदलता है और मुखगुहा में बनने वाला लार कार्बोहाईड्रेट का पाचन करता है |
ii). अमाशय – हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और जठर रस का स्राव करना |
iii). पक्वाशय – इसमें भोजन के प प्रोटीन का पाचन होता है |
iv). छोटी आंत – इसमें भोजन के पचे हुए शेष भागो का पाचन तथा पचे हुए भोजन का अवशोषण होता है |
v). बड़ी आंत – इसके द्वारा अनपचे भोजन के अतिरिक्त जल को सोखकर मल के रूप में उत्सर्जित कर दिया जाता है |


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