jac 10th science important question in hindi

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प्रश्न :- वाष्पोत्सर्जन क्या है ? पादप में इसका महत्व बताइए |

उतर :-

पादप  में पत्तियों की सतह से तथा प्ररोह के अन्य हिस्सों से, वातावरण में जल की जलवाष्प के रूप में हानि को वाष्पोत्सर्जन कहते हैं |
i). शीतलन प्रभाव  - वाष्पन तापमान को कम करता है | इसलिए वाष्पोत्सर्जन कड़ी धुप के दिनों में पादपो के लिए लाभप्रद है |
ii). चूषण बल – वाष्पोत्सर्जन पादप के शिखर पर चूसन बल उत्त्पन्न करके रस के ऊपर चढने में मदद करता है | पत्तियों में वाष्पन कोशिका रस को सान्द्र करता है तथा उनका परासरण दाब बढ़ता है | यह जल को निचे स्तर की कोशिकाओ से क्रमबद्ध रूप में ऊपर की ओर खींचता है , अतः अंत में मृदा से जल परासरण द्वारा अवशोषण में मदद करता है |
iii). जल का वितरण – क्योंकि पत्तियां शाखाओं के शिखरों पर स्थापित होती है, अतः पत्तियों की सतह से वाष्पोत्सर्जन, जल को पत्तियों की ओर खींचता है | और इसप्रकार पादप शरीर के सभी हिस्सों में जल का वितरण करता है |
iv). आधिक्य जल का निकालना – जड़े निरंतर बहुत बड़ी मात्रा में जल का अवशोषण करती है | वाष्पोत्सर्जन एक बहुत प्रभावी तरीका है जिसके द्वारा आधिक्य जल निकाला जा सकता है  |


प्रश्न :- स्वयंपोषी पोषण तथा विषमपोषी पोषण में क्या अंतर है ?

उतर

स्वयंपोषी पोषण
i). स्वपोषी पोषण हरे पौधे में होता है |
ii). ये ऐसे घटक हैं जो प्रकाश-संश्लेषण द्वारा अपने भोजन का निर्माण स्वयं करते हैं |
iii). इनमे क्लोरोफिल होता है |
iv). इनमे प्रकाश संश्लेषण होता है |
v). उदाहरण – हरे पौधे, स्वपोषी जीवाणु |
विषमपोषी पोषण
i). विषमपोषी पोषण हरे पौधे तथा कुछ शैवालों को छोड़कर बाकि सभी जीवों में होता है |
ii). ये भोजन के लिए स्वपोषित घटक द्वारा संश्लेषित पदार्थो पर निर्भर होते हैं |
iii). इनमे क्लोरोफिल नहीं होता है |
iv). इनमे प्रकाश संश्लेषण नहीं होता है |
v). उदाहरण - अमीबा, मेढ़क, मनुष्य आदि

प्रश्न :- स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक परिस्थियाँ कौन सी है और उसके उपोत्पाद क्या हैं ?

उतर

स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक शर्ते है-
i). जैव कोशिकाओं में क्लोरोफिल की उपस्थिति |
ii). पादप कोशिकाओं या हरे हिस्सों में पानी की आपूर्ति का प्रबंध या तो जड़ो द्वारा या आसपास के वातावरण के द्वारा |
iii). पर्याप्त सूर्य प्रकाश उपलब्ध हो, क्योकि प्रकाश संश्लेषण के लिए प्रकाश उर्जा आवश्यक है |
iv). पर्याप्त कार्बनडाइआक्साइड ( CO2 ), जो प्रकाश संश्लेषण के दौरान शर्करा के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण अवयव है |
स्वपोषी पोषण के उपोत्पाद – स्टार्च ( शर्करा ), जल तथा O2


jac board class 10 science important question

प्रश्न :- प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक कच्ची सामाग्री पौधा कहाँ से प्राप्त करता है और प्रकाश संश्लेषण के दौरान कौन सी घटनाए होती हैं ?

उतर

प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक कच्ची सामग्री को पौधा अलग-अलग स्रोतों से प्राप्त करता है | जैसे –
i). पर्णहरित – पत्ती के हरित लावक से |
ii). कार्बन डाइआक्साइड – वायुमंडल से |
iii). जल इत्यादि – मृदा से
प्रकाश संश्लेषण के दौरान निम्नाकित घटनाए होती है –
i). क्लोरोफिल द्वारा प्रकाश उर्जा का अवशोषण |}
ii). प्रकाश उर्जा का रासायनिक उर्जा में परिवर्तन तथा जल अणु का हाईड्रोजन तथा आक्सीजन में टूटना |
iii). कार्बन डाइआक्साइड का शर्करा में अपघटन


प्रश्न :- हमारे अमाशय में अम्ल की भूमिका क्या है तथा पाचक एंजाइमों का क्या कार्य है ?

उतर

अम्ल की भूमिका –
i). अमाशय में पाए जाने वाले एंजाइम भोजन का पाचन अम्लीय माध्यम से करते हैं | अमाशय में अम्ल भोजन को अम्लीय बनता है ताकि जठर रस में पाए जाने वाले एंजाइम उसे पचा सके |
ii). यह भोजन में उपस्थित जीवाणुओं को नष्ट कर देता है |

पाचक एंजाइम का कार्य –
पाचक एंजाइम उत्प्रेरक क्रिया द्वारा भोजन के जटिल अवयवों को सरल भागो में खंडित कर देते हैं जिससे वे घुलनशील हो जाते हैं और शरीर में उनका अवशोषण हो जाता है |

प्रश्न :- पचे हुए भोजन को अवशोषण करने के लिए क्षुद्रांत्र को कैसे अभिकल्पित किया गया है ?

उतर :-

क्षुद्रांत्र की आतंरिक भित्ति पर असंख्य रंसाकुर पाए जाते हैं | इनमे रक्त वाहिकाओं एवम लिम्फ वाहिनी का जाल बिछा होता है | विसरण क्रिया द्वारा भोजन का प्रोटीन, ग्लोकोज, खनिज, विटामिन इत्यादि रक्त में शोख लिए जाते हैं वसीय अम्लों एवम ग्लिसरॉल का अवशोषण लिम्फ वाहिनी में होता है |
उपर्युक्त के अतिरिक्त क्षुद्रांत्र की संकुचन और अनुशिथिलन की गति भी भोजन के अवशोषण में एक सीमा तक अवश्य सहायक होती है |



jac board class  10 science important question in hindi

प्रश्न :- हमारे शरीर में वसा का पाचन कैसे होता है ? यह प्रक्रम कहाँ होता है ?

उतर :-

मनुष्य पाचन तंत्र में वसा का पाचन –
i). पक्वाशय में पित से मिलने पर वसा का पायसीकरण ( इमल्सिकरण ) होता है |
ii). अग्नाशियक रस में पाए जाने वाला लाइपेज नामक पाचक रस पायसीकृत वसा को वसीय अम्ल और ग्लिसरॉल में बदल देता है |
पायसीकृतवसा + लाइपेज ---- वसीय अम्ल + ग्लिसरॉल
iii). वसीय अम्ल और ग्लिसरॉल छोटी आंत में पाए जाने वाले दीर्घ रोमो के अन्दर लिम्फ वाहिनीयों में सोख लिए जाते हैं जहाँ से वे रुधिर में पहुँच जाते हैं | यह प्रक्रम क्षुद्रांत के अग्रभाग या पक्वाशय में होता है |


प्रश्न :- मानव की क्षुद्रांत्र में होने वाली पाचन प्रक्रियाओं का सक्षेप में वर्णन करें |

उतर

i). अधूरे पचित शर्करा, प्रोटीन तथा वसा क्षुद्रांत्र में पहुँचते हैं |
ii). क्षुद्रांत्र की भित्ति में ग्रंथि होती है जो आंत्र रस स्रावित करती है | यह पाचन क्रिया को पूर्णतया प्रदान करते हैं, जो निम्नाकिंत हैं –
a). समस्त प्रोटीन एमिनो अम्ल में पाचित हो जाते है |
b). समस्त शर्करा अंततः ग्लोकोज में पाचित हो जाते हैं |
c). वसा का कण वसा अम्ल तथा ग्लिसरॉल में पाचित हो जाते हैं |


प्रश्न :- दीर्घरोम के दो कार्य लिखे | क्षुद्रांत्र में पाचित भोजन के अवशोषण में दिर्घरोम ( प्रवार्धों ) के योगदान का संक्षेप में वर्णन करें |

उतर :-

दीर्घरोम के दो कार्य:-
i). क्षुद्रांत्त में अवशोषण के सतही क्षेत्रफल को बढ़ाना ,
ii). पाचक रसों का स्राव करना |

पाचित भोजन को आंत में भित्ति अवशोषित कर लेती है | क्षुद्रांत्र के आन्तरिक स्तर पर अनेक अंगुली जैसे प्रवर्ध होते हैं जिन्हें दिर्घरोम कहते हैं | ये अवशोषण का साथी क्षेत्रफल बढ़ा देते हैं | दिर्घरोम में रुधिर वाहिकाओं की बहुतायत होती है जो भोजन को अवशोषित करके शरीर की प्रत्येक कोशिका तक पहुंचाते हैं | यहाँ इसका उपयोग उर्जा प्राप्त करने, नये उतकों के निर्माण और पुराने उतकों की मरम्मत में होता है |

प्रश्न :- यकृत, अग्नाशय और पितरस के दो-दो कार्य लिखे |

उतर :-


यकृत के कार्य :-
i). यकृत की कोशिकाए पित का स्राव करती है |
ii). अतिरिक्त ग्लोकोज ग्लाइकोजन के रूप में परिवर्तित करके यकृत में संग्रह किया जाता है |

अग्नाशय के कार्य :-
i). यह अग्नाशयिक रस का संश्लेषण संग्रह करता है जिसमे महत्वपूर्ण प्रोटीन वसा एवम कार्बोहाईड्रेट पाचक एंजाइम होते हैं |
ii). यह इंसुलिन और ग्लूकागान जैसे महत्वपूर्ण हार्मोन का स्राव करता है |

पितरस के कार्य :-
i). अमाशय से आये भोजन के अम्लीय प्रभाव को क्षारीय बनाता है |
ii). यह आंत की दीवारों को क्रमाकुंचन के लिए उत्तेजित करता है |

jac 10th science important question

प्रश्न :- श्वसन के लिए आक्सीजन प्राप्त करने की दिशा में एक जलिए जीव की अपेक्षा स्थलीय जीव किस प्रकार लाभप्रद है ?

उतर :-

i). स्थलीय जीव वातावरण से आक्सीजन लेते हैं तथा वातावरण में आक्सीजन की बहुलता रहती है | इसके विपरीत जलीय जीव जल में घुलित आक्सीजन का उपयोग करते हैं जिसकी मात्रा बहुत कम होती है |
ii). स्थलीय जीवों में आक्सीजन का अवशोषण भिन्न भिन्न अंगो द्वारा किया जाता है | इन सभी अंगो द्वारा किया जाता है | इन सभी अंगो में सतही क्षेत्रफल को बढ़ाने की क्षमता होती है जो आक्सीजन के संपर्क में रहता है | अतः इन जीवों को धीमी गति से साँस लेना पड़ता है जबकि जलीय जीवों को तेजी से साँस लेना पड़ता है |
     यही कारण है की श्वसन के लिए आक्सीजन प्राप्त करने की दिशा में एक जलिए जीव की अपेक्षा स्थलीय जीव लाभप्रद है |


प्रश्न :- आक्सी ( वायवीय ) और अनाक्सी ( अवायवीय ) श्वसन में अंतर लिखे |

उतर :-

आक्सी ( वायवीय ) श्वसन :-
i). इस श्वसन के लिए आक्सीजन आवश्यक है |
ii). आक्सी श्वसन में अधिक उर्जा मुक्त होती है |
iii). C6H12O6 + 6O2 ---- 6O2 + 6H2O + उर्जा

अनाक्सी ( अवायवीय ) श्वसन
i). इस श्वसन के लिए आक्सीजन आवश्यक नहीं है |
ii). अनाक्सी श्वसन में कम उर्जा मुक्त होती है |
iii). C6H12O6 ---- 2C2H5OH + 2CO2 + उर्जा


प्रश्न :- मनुष्य में आक्सीजन तथा कार्बनडाइआक्साइड का परिवहन कैसे होता है ?

उतर :-

मनुष्य एक जटिल शारीरिक रचना वाला विकसित प्राणी है | अतः साधारणतः विसरण क्रिया द्वारा इसके फेफड़े के बिच गैसीय विनिमय संभव नहीं है | कूपिका भित्तियों में पाए जाने वाले रक्त का श्वसन वर्णक हिमोग्लोबिन आक्सीजन से संयुक्त होकर आक्सी हिमोग्लोबिन बन जाता है | यह आक्सीजन को स्थल तक छोड़कर पुनः हिमोग्लोबिन बन जाता है | यह रक्त में घुलित कार्बन डाइआक्साइड को  भी लाकर कुपिकाओं में छोड़ता है | फेफड़ो के पिचकने पर कार्बन डाइआक्साइड श्वतः बाहर निकल जाती है | यदि हमारे शरीर में हिमोग्लोबिन नहीं होता तो फेफड़े से फिर तक आक्सीजन लगभग 3 वर्षो में पहुँच पाती |
हिमोग्लोबिन + आक्सीजन --- आक्सी हिमोग्लोबिन
हिमोग्लोबिन + कार्बनडाइआक्साइड ---- कार्बोक्सी हिमोग्लोबिन


jac board class 10 science important question

प्रश्न :- कूपिका किसे कहते हैं ? गैसों के अधिकतम विनिमय के लिए कुपिकाएँ किस प्रकार अभिकल्पित हैं ?

 उतर :-

 कूपिका – फुफ्फुस के अन्दर मार्ग छोटी और छोटी नलिकाओं में विभाजित हो जाता है जो अंत में गुब्बारे जैसी रचना में अंतकृत हो जाता है, जिसे कूपिका कहते हैं |
i). कूपिका की भित्ति पतली होती है तथा रुधिर वाहिकाओं के जाल से ढकी हुई होती है, जिससे गैसों का आदान प्रदान, रुधिर तथा कूपिका के अन्दर भरी हवा के बिच अधिकाधिक हो सके |
ii). कूपिका की संरचना गुब्बारे के समान है, जो गैसों के आदान-प्रदान के लिए सतही क्षेत्र बढ़ा देती है |



प्रश्न :- हमारे शरीर में हिमोग्लोबिन की कमी के क्या परिणाम हो सकते हैं ?

उतर :-

हिमोग्लोबिन लाल रंग का रंजक है जो रुधिर में उपस्थित होता है | इसकी कमी से आक्सीजन और कार्बन डाइआक्साइड का परिवहन प्रभावित हो सकता है | हिमोग्लोबिन फेफड़े से आक्सीजन प्राप्त कर उसे सारे शरीर में पहुंचाता है | यदि हिमोग्लोबिन की मात्रा कम जायगी तो शरीर के सभी भागो में आक्सीजन की मात्रा नहीं पहुँच पायेगी | इसके परिणाम स्वरूप भोजन का आक्सीजन पूर्ण रूप ने नहीं हो सकेगा तथा उर्जा का उत्पादन कम होगा | इससे शारीरिक कमजोरी बढ़ेगी |
   हिमोग्लोबिन की कमी की स्थिति को रक्त-अल्पता के नाम से जाना जाता है |


प्रश्न :- मानव के श्वसन में हिमोग्लोबिन की क्या भूमिका है ?

उतर :-

हिमोग्लोबिन एक प्रकार का परिवहन प्रोटीन है | यह रक्त से उतकों तक आक्सीजन के परिवहन का कार्य करता है |
जब हिमोग्लोबिन आक्सीजन से संयुक्त होता है तब वह आक्सीहिमोग्लोबिन बन जाता है | परन्तु जब आक्सीजन की आवश्यकता होती है तब आक्सीहिमोग्लोबिन पुनः हिमोग्लोबिन और आक्सीजन में टूटकर आक्सीजन को मुक्त कर देता है |

jac 10th science important question 

प्रश्न :- श्वसन और प्रकाश संश्लेषण में अंतर लिखे |

उतर :-

श्वसन –
i). यह एक अपचयन क्रिया है |
ii). इसमें ग्लूकोज का आक्सीकरण होता है |
iii). इसमें आक्सीजन का उपयोग होता है |
iv). यह जीवधारियों में उर्जा उत्पादन का एकमात्र जैविक प्रक्रम है |
v). इसके अंत में कार्बनडाइआक्साइड मुक्त होती है |


प्रकाश संश्लेषण –
i). यह एक उपचयन क्रिया है |
ii). इस्मो ग्लूकोज का संश्लेषण होता है |
iii). इसमें कार्बनडाइआक्साइड का उपयोग होता है |
iv). यह भोजन उत्पादन का एकमात्र प्रक्रम है |
v). इसके अंत में आक्सीजन मुक्त होती है |

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