दीर्घरोम के दो कार्य लिखे | क्षुद्रांत्र में पाचित भोजन के अवशोषण में दिर्घरोम ( प्रवार्धों ) के योगदान का संक्षेप में वर्णन करें



प्रश्न :- दीर्घरोम के दो कार्य लिखे | क्षुद्रांत्र में पाचित भोजन के अवशोषण में दिर्घरोम ( प्रवार्धों ) के योगदान का संक्षेप में वर्णन करें |


उतर :-

दीर्घरोम के दो कार्य:-

i). क्षुद्रांत्त में अवशोषण के सतही क्षेत्रफल को बढ़ाना ,
ii). पाचक रसों का स्राव करना |

पाचित भोजन को आंत में भित्ति अवशोषित कर लेती है | क्षुद्रांत्र के आन्तरिक स्तर पर अनेक अंगुली जैसे प्रवर्ध होते हैं जिन्हें दिर्घरोम कहते हैं | ये अवशोषण का साथी क्षेत्रफल बढ़ा देते हैं | दिर्घरोम में रुधिर वाहिकाओं की बहुतायत होती है जो भोजन को अवशोषित करके शरीर की प्रत्येक कोशिका तक पहुंचाते हैं | यहाँ इसका उपयोग उर्जा प्राप्त करने, नये उतकों के निर्माण और पुराने उतकों की मरम्मत में होता है |



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