Ncert class 10 science important question chappter 15

NCERT
CLASS 10
SCIENCE
CHAPPTER 15
TOP14 IMPORTANT QUESTIONS

हमारा पर्यावरण


1). ऐसे दो तरीके सुझाइए जिनमें जैव निम्नीकरणीय पदार्थ पर्यावरण को प्रभावित करते हैं |
Ans. ( i ) जैव निम्नीकरणीय पदार्थ अपघटित होते समय दुर्गंध एवं हानिकारक गैस मुक्त करते हैं जिससे सामुदायिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है
( ii ) जैव निम्नीकरण पदार्थ के साथ बीमारियों के सूक्ष्मजीव पलते हैं जो बीमारियां फैलाते हैं तथा अन्य स्रोतों को भी संदूषित और संक्रमित करते हैं

2). ऐसे दो तरीके बताइए जिनमें अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ पर्यावरण को प्रभावित करते हैं
Ans. ( i )  जैव - आवर्धन के द्वारा डीडीटी तथा अन्य कीटनाशी दवाओं में प्रयुक्त रसायन का खाद्य श्रृंखला में प्रवेश
( ii ) पारा , शीशा , अर्सेनिक आदि के कणों के वातावरण तथा जल में उपस्थित से परितंत्र का संतुलन बिगड़ना ।
3). क्या कारण है कि कुछ पदार्थ जैव निम्नीकरणीय होते हैं और कुछ अजैव निम्नीकरणीय ?
Ans. विभिन्न सूक्ष्म जीव जैसे जीवाणु और कवक विभिन्न पदार्थों को एंजाइमों की सहायता से बचाते हैं । एंजाइमों द्वारा अधिकांश पदार्थों का अपघटन होता है तथा वे पदार्थ जैव - भू - रासायनिक चक्र में प्रविष्ट हो जाते हैं । वे पदार्थ जिनका अपघटन एंजाइमों द्वारा होता है , वे जैव निम्नीकरणीय होते हैं । उदाहरण -  घर की रसोई का कूड़ा ,मल-मूत्र , कृषि उत्पादित अपशिष्ट ,कागज, लकड़ी कपड़ा आदि ।
                        कुछ ऐसे भी पदार्थ हैं जैसे प्लास्टिक जिनका निम्नीकरण सूक्ष्मजीव नहीं कर पाते हैं । ये अजैव निम्नीकरणीय कहलाते हैं ।
4).  हमारे द्वारा उत्पादित अजैव निम्नीकरणीय कचरे से कौन सी सी समस्याएं उत्पन्न होती है ?
Ans. अजैव निम्नीकरणीय कचरे से निम्नांकित समस्याएं उत्पन्न होती है -
( i ) अजैव  निम्नीकरणीय कचरे से भूमि प्रदूषित होती है ।
( ii )  जल में मिलकर यह जल को प्रदूषित करते हैं ।
( iii ) नाले - नालियों में अवरोध पैदा होता है जिसके कारण गंदे जल का जमाव होता है
( iv ) अजैव निम्नीकरणीय कण खाद्य पदार्थों में मिलकर जैव - आवर्धन करते हैं जिसमें जंतुओं में अनेक प्रकार की बीमारियां होती है ।
5). यदि हमारे द्वारा उत्पादित सारा कचरा जैव निम्नीकरण हो तो क्या इनका हमारे पर्यावरण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा ?
Ans. जैव निम्नीकरणीय पदार्थ, सूक्ष्म जीवों द्वारा सरल पदार्थों में विघटित किए जा सकते हैं । यह अपघटित पदार्थ जैव -भू - रासायनिक चक्र में प्रविष्ट हो जाते हैं ।  उदाहरण - घर की रसोई का कूड़ा , मल-मूत्र , कृषि उत्पादित अपशिष्ट , कागज,  लकड़ी, कपड़ा आदि ।
                  यदि उनका निपटान उचित ढंग से कर दिया जाए तो हमारे द्वारा उत्पादित जैव निम्नीकरणीय कचरे का पर्यावरण पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा । लेकिन , उचित निपटान नहीं करने पर वायु प्रदूषण एवं जल प्रदूषण की समस्या हो सकती है
6). परितंत्र से क्या अभिप्राय है ?इसके प्रमुख घटकों के नाम तथा उदाहरण बताइए ।
Ans.  किसी निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में उपस्थित जैव तथा अजैव कारक मिलकर परितंत्र का निर्माण करते हैं । एक परितंत्र में सभी सजीव परस्पर अन्योन्य क्रिया करते हैं तथा अजैव कारको से प्रभावित होते हैं । इसके प्रमुख घटक हैं --
     जैव घटक : उदाहरण-- सूक्ष्म जीव ,जंतु तथा पौधे आदि ।                                       
     अजैव घटक : उदाहरण -- ताप, वर्षा , वायु ,मृदा ,खनिज    
         आदि ।
7). पोषी स्तर क्या है ? एक आहार श्रृंखला का उदाहरण दीजिए तथा इसके विभिन्न पोषी स्तर बताइए ।
अथवा
किसी घास के मैदान की आहार को प्रवाह चार्ट द्वारा परिभाषित कीजिए ।
Ans. पोषी स्तर : आहार श्रृंखला के विभिन्न चरणों को पोषी स्तर कहते हैं । इन अलग-अलग चरणों पर स्थित जीवों  के पोषण की प्रकृति भिन्न-भिन्न होती है ।
      इसके लिए घास के मैदान की निम्नांकित आहार श्रृंखला को उदाहरण स्वरूप ले सकते हैं --
घास -- टिड्डा -- मेढ़क -- साँप -- बाज -- मृत्यु/अपघटन
      उपर्युक्त आहार श्रृंखला में  उत्पादक तथा विभिन्न श्रेणियों के उपभोगता  अलग-अलग पोषी स्तर हैं । सर्वोच्च उपभोक्ता की मृत्यु के उपरांत अपघटक (जीवाणु /कवक ) उसके मृत शरीर का अपघटन करते हैं और उसे पोषण पोषण प्राप्त करते हैं ।  इस प्रकार मृतजीवी सूक्ष्मजीव भी एक महत्वपूर्ण पोषी स्तर बनाते हैं ।
8).  क्या होगा यदि हम एक  पोषी स्तर के सभी जीवो को समाप्त कर दें ?
Ans. किसी आहार श्रृंखला के एक पोषी स्तर के सभी जीवो को समाप्त कर देने पर पारिस्थिकी संतुलन बिगड़ जाएगा । आहार श्रृंखला में प्रत्येक पोषी स्तर एक दूसरे से आहार संबंध से जुड़ा है । अतः एक पोषी स्तर के सभी जीवो को समाप्त कर देने से आहार श्रृंखला का क्रम टूट जाएगा जिससे खाद्य श्रृंखला में ऊर्जा का प्रवाह रुक जाएगा । जिससे खाद्य श्रृंखला में ऊर्जा का प्रवाह रुक जाएगा तथा पर्यावरणीय समस्या उत्पन्न होगी ।

9).  पारितंत्र में अपमार्जको की क्या भूमिका है ?
अथवा,
अपमार्जक क्या है ?
Ans. किसी पारितंत्र में उपस्थित जीवाणु और कवक जैसे मृतजीवी सूक्ष्मजीवों को अपमार्जक कहा जाता है । अपमार्जक मृतजैव अवशेषों का अपमार्जन करते हैं ।यह जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल अकार्बनिक पदार्थों में बदल देते हैं जो मिट्टी द्वारा अवशोषित कर लिए जाते हैं । मिट्टी से यह पदार्थ पौधों में चले जाते हैं जिसे प्राथमिक उपभोक्ता द्वारा उपयोग में लाया जाता है । इस प्रकार अपमार्जके पारितंत्र एवं आहार - तंत्र को संतुलित करने का कार्य करते हैं ।
10). जैव भू रसायन चक्र क्या है ? कोई दो उपयुक्त उदाहरण दे।
Ans. भूमि में पाए जाने वाले रसायन जो अवशोषित होकर पौधों में पहुंचते हैं उन से तरह-तरह के यौगिकों का संश्लेषण होता है जिन्हें जैव रसायन कहते हैं । यह रसायन आहार श्रृंखला के माध्यम से चक्रीय पथ में भ्रमण करते हैं और जीवधारी की मृत्यु के पश्चात जैव अपघटन के प्रक्रम द्वारा पुनः भूमि में पहुंच जाते हैं । इसे जैव - भू - रसायन चक्र कहते हैं
   उदाहरण - जल चक्र, नाइट्रोजन चक्र , आहार चक्र आदि।
11). जैव आवर्धन से आप क्या समझते हैं ? पिड़कनाशी रसायनों का अत्यधिक प्रयोग किस प्रकार जैव आवर्धन की समस्या उत्पन्न कर रहे हैं ?
Ans. जैव निम्नीकरणीय रासायनिक पदार्थ जैसे कीटनाशक आहार श्रृंखला के माध्यम से पौधों द्वारा अवशोषित हो जाने के बाद उपभोक्ता के शरीरों के वशीय ऊतकों  में संचित होते रहते हैं ।चूँकि  मनुष्य सर्वोच्च उपभोक्ता है,  अतः यह रसायन मनुष्य के शरीर की अंतिम रूप से पहुंचते हैं और संचित हो जाते हैं । वहां मनुष्य के वशीय ऊतकों   में इन  पदार्थों का सांद्रण बढ़ता रहता है । इसे जैव आवर्धन कहते हैं
          हां , पारितंत्र के विभिन्न स्तरों पर यह आवर्धन भिन्न-भिन्न होगा तथा सर्वोच्च स्तर पर जैव आवर्धन सर्वाधिक होगा।
12). ओजोन क्या है ? यह किसी पारितंत्र को किस प्रकार प्रभावित करती है ?

Ans. ओजोन ऑक्सीजन का एक समस्थानिक है । इसके एक अनु में ऑक्सीजन के 3 परमाणु होते हैं । सूर्य की पराबैंगनी किरणों के प्रभाव से ऑक्सीजन अपने परमाणु में टूट जाती है, तथा प्रत्येक परमाणु ऑक्सीजन से संयुक्त होकर ओजोन का अणु बनाती है ।
   O2 --- O + O
    O + O2 ---  O3 (ओजोन)
प्रभाव : यह पृथ्वी के पारितंत्र के लिए एक सुरक्षा छतरी का काम करती है और पृथ्वी की ओर आने वाली पराबैंगनी विकिरण को सोख लेती है । पराबैगनी विकिरण जीवन के लिए अत्यंत हानिकारक होता है इससे त्वचा का कैंसर , मोतियाबिंद आदि भयानक बीमारियां होती है । यह पौधे की पत्तियों को क्षतिग्रस्त कर देता है ।
13).ओजोन परत में ह्रास क्यों हो रहा है ? इसके क्या दुष्प्रभाव हैं ?
Ans. रेफ्रिजरेटर , एयर कंडीशनर,  अग्निशामक युक्ति तथा एयरोसोल स्प्रे में क्लोरोफ्लोरोकार्बन होता है । विश्व में इन चीजों के अत्यधिक उपयोग के कारण वायुमंडल में सीएफसी की मात्रा बढ़ जाती है । सीएफसी वायुमंडल के ऊपरी सतह जिसे ओजोन परत कहते हैं,  वहां जाकर ओजोन से प्रतिक्रिया कर इस परत को पतला बनाता है । इसे ओजोन अवक्षय या ह्रास कहते हैं । ओजोन परत के अपक्षय के दुष्प्रभाव :- ओजोन परत सूर्य प्रकाश में उपस्थित पराबैगनी किरण को परावर्तित कर वायुमंडल में घुसने से रोकती है । ओजोन परत में ह्रास के कारण अल्ट्रावायलेट किरणें पृथ्वी तक आने लगती है । यह किरण जीवो के स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक के स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक हानिप्रद होती है ।
इसके कारण (i) त्वचा कैंसर होता है (ii) आंखों में मोतियाबिंद का होना (iii) शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता घट जाती है (iv )आनुवंशिक रोग आदि होते हैं ।
14). ओजोन परत की क्षति हमारे लिए चिंता का विषय क्यों हैं ? इसका बचाव के लिए क्या उपाय है ?
Ans. ओजोन परत की क्षति से सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणें पृथ्वी की सतह तक पहुंच जाएगी , इसलिए इस परत की क्षति हमारे लिए चिंता का विषय है
ओजोन परत की क्षति को सीमित करने के उपाय निम्नलिखित है -
( i)  क्लोरोफ्लोरोकार्बन रसायनों का उपयोग ना करके
(ii ) एरोसोल रसायनों का उपयोग कम से कम करके
( iii ) सुपरसोनिक विमानों का उपयोग कम करना
ओजोन परत की क्षति को सीमित करने के लिए संयुक्त सर्वज्ञ पर्यावरण कार्यक्रम 1987 में प्रारंभ किया गया । इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सदस्य राष्ट्रों के बीच, ओजोन परत के भय के भय के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार रसायन सीएफसी के न्यूनतम उत्पादन पर आपसी सहमति बनाना था ।